Singrauli News : सरई से महज 15 KM की दूरी पर स्थित सोनगढ़ गेट खुले तो यहीं मिलेगा जंगल सफारी का भरपूर मजा

Singrauli News : नववर्ष के शुरू होने पर जिले से सैकड़ों लोग सीधी से लगभग 70 किमी दूरी पर स्थित मप्र पर्यटन विभाग के पारसीली रिसॉर्ट पहुंचे। कुछ बांधवगढ़ तो कुछ अन्य स्थानों पर पहुंचकर वन्य प्राणियों को देखने के लिए लालायित रहे। ऐसे में सई से महज 15 किमी की दूरी पर स्थित सोनगढ़ पार्क परिक्षेत्र मोहन संजय टाइगर रिजर्व के वनरक्षक नाका के पास बने गेट को पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है, जिससे सिंगरौली के लोगों को सबसे नजदीक वन पर्यटन का अवसर मिल जायेगा। सोनगढ़ नाका के गेट में आम लोगों के आवगमन को प्रतिबंधित किया गया है। गत दिवस गेट से अंदर जाकर पर्यटन की लालसा रखने वाले लोगों को वन रक्षक और रेंजर ने गेट से अंदर जाने पर रोक लगी होने का हवाला दिया। बताया कि कुछ बिना कॉलर वाले बाघों का विचरण हो रहा है और किसी भी वाहन अथवा अनजान व्यक्ति को अंदर जाने की मनाही है, जबकि इसी गेट से कई किमी अंदर बसे कई गांवों के लोग आना-जाना पूरे दिन बना रहता है। सरई से लगे संजय गांधी रिजर्व टाइगर की सीमा के गेट की बजाय कुसमी जाकर दूसरी तरफ के गेट से अंदर जाने की परमीशन लेकर अंदर जाने के लिए कहा गया। यानि कम से कम 22 किमी की दूरी पर स्थित गेट से अंदर जाने की परमीशन मिल सकती है, तो सोनगढ़ गेट से क्यों नहीं खोला जा सकता है?

इस गेट से भी शुरू की जाए इंट्री

नियमों को लागू करते हुए सोनगढ़ गेट से भी पर्यटकों की इंट्री के लिए परमीशन दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय लोग भी पर्यटन का आनंद उठा सके। इसके लिए जिस प्रकार कुसमी व अन्य गेटों से लोगों को परमीशन दी जाती है. उसी प्रकार अमले की तैनाती कर सुविधा शुरू की जानी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो जिले के लोगों को वन्य प्राणियों के अवलोकन का आनंद मिलना शुरू हो जायेगा। मौके बे-मैके यूपी, एमपी के पर्यटक स्थलों पर पहुंचने की बजाय यहां भी लोगों का आना-जाना शुरू होगा। इससे एक नए पर्यटन स्थल की शुरुआत होगी।

गोपद नदी और पहाड़ियों से घिरा है स्थल

गोट से लगे हुए कई रमणीक स्थल भी हैं। महज 500 मीटर की दूरी पर बहती गोपथ नदी का बजार हर किसी को बरबस अपनी ओर खींचता है। सोने सी बिछी रेत और किनारों को काटती हुई धार देखते ही बनती है। पास ही कई पहाड़ियों का अपना अलग स्वरूप है। यदि वन विभाग और रिजर्व फरिस्ट के द्वारा गेट को पर्यटकों के लिए खोला जाता है तो यहां पर सैकड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिल जायेंगे। इसके साथ ही आदिवासी अंचल के लोगों को बाहर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

आसपास बसे हैं कई गांव

गेट के अंदर भी कई गांव बसे है, जहां पर सैकड़ों लोग बसे हुए हैं। रिजर्व फॉरेस्ट होने के बाद भी इन लोगों को उनके पुश्तैनी निवास स्थल से नहीं हटाया गया है। कई-कई किमी पैदल चलकर आज भी लोग अपनी जरूरत का सामान लेने के लिए जाते हैं। दूर-दूर बने घर और आसपास खेती करते लोग अभी भी बाहरी दुनिया से दूर हैं। जिन्हें समाज की मुख्य धारा में आने का मौका मिलेगा, साथ ही स्थानीय लोगों को जंगल सफारी और वन पर्यटन का अवसर भी मिल जायेगा।

इनका कहना है

यह रिजर्व एरिया है, इसलिए गेट नहीं खोला जाता है। कई गांव अंदर में बसे हुए हैं, उन्हें विस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उसके बाद ही इस मेट को पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है। जिसके लिए प्रक्रिया चल रही है, लेकिन ये लोग अपना पुस्तैनी गांव नहीं छोड़न चाहते हैं। गोविंद प्रसाद रेंजर – संजय गांधी टाइगर रिजर्व सीधी 

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