Singrauli News : रिहंद और काचन जलाशय में मिले 20 से अधिक प्रजातियों के जलीय-स्थलीय पक्षी

Singrauli News : मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में भारी प्रदूषण के बावजूद रिहंद जलाशय व काचन जलाशय में पक्षियों की मौजूदगी सुखद संकेत है। इतना ही नहीं, यहां पर कई प्रकार के प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी भी देखने को मिली है, जिसको एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। जिले में एशियन वॉटर बर्ड सेंसस-2026 के तहत पक्षियों की गणना की जा रही है। वन अमले ने 3 एवं 4 जनवरी को पक्षियों की गणना की। जिसमें सिंगरौली जिले के वेटलैंड (आर्द्रभूमि) रिहन्द जलाशय एवं काचन जलाशय में जलीय और स्थलीय पक्षियों की गणना की गई।

इस दौरान 20 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई। इसमें विभिन्न प्रकार के प्रवासी, संकटग्रस्त प्रजाति के पक्षी पाए गए हैं। जिनमें मुख्य तौर पर पेलिकन, बगुला, सारस, बतख, हंस, घरेलू गौरेया, कोयल, कौआ, मैना, दयाल, कलचुरी, हरी पतफुदकी, तोता, सफेद छाती किलकिला, ब्लैक ड्रॉगो, सफेद बगुला, मलंग बगुला, छोटा पनकोवा आदि पक्षी देखे गये जो पर्यावरण की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। वेट लैंड या आर्द्रभूमि यानी गीली मिट्टी में पाए जाने वाले पक्षियों को जलीय पक्षी कहा जाता है। इनकी जनगणना वर्ष 2026 का आयोजन जिला वन मंडलाधिकारी अखिल बंसल के मार्गदर्शन में नोडल अधिकारी नरेन्द्र त्रिपाठी उप वनमंडल अधिकारी वैढ़न की उपस्थिति एवं नेतृत्व में की गई।

दो जलाशय चिन्हित

जिले के दो प्रमुख जलाशय वेटलैंड के रूप में चिन्हित हैं, जिसमें पक्षियों की विभिन्न प्रकार की प्रजातियां पायी जाती हैं। यदि इन जलाशयों को प्रदूषण से बचाते हुए स्वच्छ रखा जाता है तो निकट भविष्य में और भी पक्षियों की उपस्थिति यहां पर दर्ज हो सकती है। इन जलाशयों में 3 व 4 जनवरी को प्रातः 7 से 11 बजे के बीच पक्षियों की गणना की गई। पक्षियों की गणना में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का मिलना एक सुखद संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। इस दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी बरगवां विकास मिश्रा, परिक्षेत्र सहायक गोभा हरिकेशर प्रधान, वनरक्षक सर्वेश तिवारी व रामसलोनी पटेल शामिल रहे।

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