Singrauli News : सरकार के खजाने में जमा होने वाली करदाताओं की गाढ़ी कमाई का ‘सदुपयोग’ देखना है तो देवरा में पानी टंकी के बगल में निर्मित दो शासकीय भवनों को देख आइए। आपको पता चलेगा कि सरकार का तकनीकी अमला कितनी दूरदर्शिता से निर्माण कार्य करता है। जानकारी के अनुसार लगभग एक करोड़ की लागत से करीब 4 वर्ष पहले यहां डॉक्टर्स आवास का निर्माण कराया गया था। तीन ब्लॉक में निर्मित 12 आवास आज तक आबाद नहीं हुए हैं, क्योंकि यहां आने-जाने के लिए रोड नहीं हैं। तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. एनके जैन ने डॉक्टरों, कार्यालय के कर्मियों व पैरामेडिकल स्टाफ को चार चार आवास आवंटित किए थे। इसके साथ ही उन्होंने व तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र सिंह ने सड़क निर्माण के लिए नगर निगम को पत्र भी लिखे, लेकिन जमीन के अभाव में सड़क नहीं बन पा रही है, जबकि उसका टेंडर हो चुका है। टेंडर पाने वाला ठेकेदार नगर निगम से रोड के लिए जमीन उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुका है, लेकिन अभी तक जमीन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। आबादी से थोड़ी दूर शासकीय जमीन पर निर्मित आवासों की वायरिंग चोर पूरी तरह उखाड़कर उठा ले गए हैं। नल तोड़ दिए या उन्हें भी चुरा लिया।
विद्युत पैनल, पंखे की वायरिंग, खिड़की के एंगल व वॉश बेसिन और रसोई के नल, टोंटी, टंकियों के पाइप सहित प्रत्येक वह सामग्री चोरी हो चुकी है जो आसानी से ले जाई जा सकती थी। भूतल व प्रथम तल के आवासों के दरवाजों में आवंटी कर्मियों के लगे ताले लटक रहे हैं या कुछ में टूट गए हैं। अंदर घुसने के लिए चोरों ने कुंडी को ही उखाड़कर दरवाजे खोल लिए। इसमें भारी पत्थर के प्रहार से फर्श की टाइल्स टूट गई है। छत पर रखी टंकियों में कई गायब हो चुकी हैं तो उनके पाइप उठा ले गए या तोड़कर बिखेर दिए हैं।
तकनीकी मंजूरी देने वाले इंजीनियर की समझ पर सवाल
प्रत्येक ब्लॉक में चार-चार सहित 12 आवासों वाले डॉक्टर्स आवास का बुधवार को यही हाल दिखा। आवासों की स्थिति देखने के बाद सड़क का निर्माण कराए बिना इसके निर्माण की तकनीकी मंजूरी देने वाले इंजीनियर की समझ पर सवाल खड़े होते हैं। कायदे से इंजीनियर व निर्माण कराने वाली एजेंसी और संविदाकार पर शासकीय राशि के दुरुपयोग को लेकर कार्रवाई होनी चाहिए, मगर इस पर जिम्मेदारी अधिकारी व शासन सब चुप हैं।
नाले के किनारे-किनारे बनाई जानी थी सड़क
स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम के जिम्मेदारों से आवास तक रोड निर्माण के लिए पूछने पर जवाब मिलता था कि पहले सहमति देने वाले किसान अब जमीन नहीं दे रहे हैं। दरअसल, ग्राम देवरा पटवारी हलका वैढ़न 34 ने जो नक्शा बनाया है उसमें पहाड़ी नाले के किनारे निजी आराजी से सटकर डॉक्टर्स आवास तक रोड दिखाई गई है। यहां से रोड बनाने के लिए नाले के किनारे रिटेनिंग वॉल बनानी पड़ेगी। बिना इसके रोड नहीं बन सकती। बगल की आराजी वाले दो-चार फीट जमीन देने के लिए तैयार हैं, मगर खेत के बीच से रोड बनाने से मना करते हैं।
OBC कन्या हॉस्टल भी पूछ रहा है सवाल
किसान प्रेमलाल शाह के घर के बगल में लगभग तीन-चार साल पूर्व बनाए गए ओबीसी कन्या छात्रावास में भी ताला बंद है। उसके दरवाजे टूट रहे तो हॉस्टल के पोर्च में हर दिन लगने वाले मवेशियों की जमघट के कारण गोबर फैला हुआ है। यह भवन जिम्मेदारों से सवाल पूछ रहा कि छात्राओं को यहां नहीं रहना था तो करदाताओं के टैक्स से खजाने में आई लाखों की राशि खर्च क्यों की गई। कोई अधिकारी यह पूछने वाला नहीं है कि आखिर इनका निर्माण क्यों हुआ है? हॉस्टल का उपयोग न होने के बारे में एसी ट्राइबल मिथिलेश इवने के मोबाइल पर दो बार कॉल कर जानने का प्रयास किया गया, मगर कॉल रिसीव नहीं हुई।