Sidhi-Singrauli NH-39 Fourlane Project: सिंगरौली से सीधी की ओर फोरलेन सड़क बनाने के लिए केसीसी बिल्डिकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने अपने संसाधन उतारने शुरू कर दिए हैं। अभी तक सीधी की ओर से फोरलेन का निर्माण शुरू होता आया है, इस बार सिंगरौली से सीधी की ओर प्रथम चरण में 37 किमी रोड का निर्माण किए जाने की योजना है। जिसमें कई पुल और आरओबी पहले तैयार किए जाएंगे। सोमवार को कुसवई से सर्किट हाउस मोड़ तक बनने वाले रेल ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए सर्वेमैनों ने सेटेलाइट के जरिए सर्वे कार्य किया।
सिंगरौली-सीधी मार्ग बनाए बरगवां के पास कैम्प बनाया जा रहा है और मशीनरी जुटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। जिस प्रकार से कंपनी ने काम शुरू किया है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पहला फोकस अब तक अर्धनिर्मित पड़े हुए पुल और पुलिया को पूरा करना है। जिनके बिना सड़क निर्माण में गति नहीं आ पा रही है। तो दूसरी तरफ यह भी माना जा रहा है कि यह कंपनी हर हाल में कार्य को पूरा करेगी।
इस कंपनी के द्वारा रीवा में भी कार्य किया जा रहा है और कई छोटी कंपनियां अलग-अलग कार्य के लिए आपसी अनुबंध कर चुकी हैं। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि कम्पनी तेजी से कार्य तो करेगी और 13 वर्ष से अधूरी पड़ी इस सड़क को हरहाल में पूरा करेगी। सबकुछ ठीक रहा तो उन पुलों पर शीघ्र मशीनें कार्य करती देखी जायेंगी, जिनमें वर्षों से कोई श्रमिक तक कार्य करने के लिए नहीं ले जाया गया है। सूत्रों की मानें तो चटका पुलिया, भूसा मोड़ का अंडरपास, सर्किट हाउस मोड़ का आरओबी और परेवा नाला पुल कंपनी के लिए पहला टास्क होगा।
आइटम रेट कांट्रेक्ट पर होगा कार्य
एनएचएआई ने इस बार केसीसी के साथ फोरलेन निर्माण के लिए आईटम रेट कांट्रेक्ट बेस कार्य के लिए निविदा शर्तें रखी हैं। यानि जितना कार्य उतना मूल्य दिया जायेगा। इसी रोड में पहली बार गैमन इंडिया लि. के लिए डिजाइन, बिल्ड फंड ऑपरेट एंड ट्रांसफर यानि डीबीएफओटी सिस्टम पर निर्माण कार्य करने लिए ठेका दिया गया था। उसके बाद टीबीसीएल के साथ ईपीसी यानि इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मोड पर कांट्रेक्ट हुआ था। यह एक टर्नकी अनुबंध था, जिसमें ठेके दार के डिजाइन, सामग्री खरीद और निर्माण तक की पूरी जिम्मेदारी लेता था। कार्य का प्रकार काफी प्रोत्साहित करने वाला
जानकारों की मानें तो इस बार आइटम रेट कांट्रेक्ट बेस ठेका दिया गया है, जहां ठेकेदार कार्य की प्रत्येक आइटम के लिए उपयोग की गई मात्रा की जानकारी देता है। भुगतान भी कार्य की वास्तविक मात्रा के अनुसार ही होता। ता। यह फोरलेन रोड लेटलतीफी की वजह से एक अनिश्चित मात्रा वाली परियोजना में शामिल हो गयी थी, इसलिए इस बार आईटम रेट आधारित भुगतान करने की प्रक्रिया अपनाई गयी है। सड़क निर्माण के लिए यह प्रक्रिया काफी उपयोगी होती है।
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