Apna Singrauli Poem: ऊर्जा की राजधानी के रूप में पहचाने जाने वाले मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले की खूबसूरती, सांस्कृतिक विरासत और औद्योगिक ताकत को एक बार फिर से स्थानीय कवयित्री शिवांगी गुप्ता ने शब्दों में जीवंत किया है। उनकी रचना “अपना सिंगरौली” इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कविता के माध्यम से उन्होंने सिंगरौली की पहचान को न केवल भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया है, बल्कि जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक महत्व को भी खूबसूरती से उभारा गया है।
Apna Singrauli Poem:-
तुम कभी सिंगरौली आना,
यहाँ की हर खासियत तुम्हें बताऐंगे।
सिंगरौली जैसे शहर में ही ,
जन्नत तुम्हे दिखाऐंगे।।
सिंगरौली की कोयलों की खानों में,
काला सोना पलता है।
सिंगरौली के कोयलों की कालिख से ही,
मेरा देश चिराग सा जलता है।।
सिंगरौली की माडा गुफाओं में,
सादियों का इतिहास बसता है।
सिंगरौली के हर पत्थरों में,
एक पुराना अतीत हँसता है।।
सिंगरौली के ज्वालामुखी मंदिर में,
रहता आस्था विश्वास है। सिंगरौली की धरती पर ही,
माँ ज्वाला का निवास है।।
सिंगरौली के रिहंद बाँध की लहरों में ,
शांति का संदेश है।
सिंगरौली के लेक पार्क में सुकून,
और रोज गार्डन में राहत का उपदेश है।।
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सिंगरौली की विंध्य पहाड़ियों में,
छुपी कहानी पुरानी है।
सिंगरौली में विंध्यवासिनी की,
भक्तों में आस्था पुरानी है।।
सिंगरौली जैसी ऊर्जा की राजधानी से,
ऊर्जा जगायी जाती है।
सिंगरौली का NTPC,NCL कहता,
मुझसे ही बिजली बनायी जाती है।।
सिंगरौली के संजय वन राष्ट्रीय उद्यान में,
चारों तरफ हरियाली छायी है।।
सिंगरौली के शिव-मंदिर में , हर-हर महादेव गूंजता है।
सिंगरौली के हनुमान मंदिर में ,
राम-नाम ही सजता है।।
सिंगरौली के वर्दी किला में,
एक इतिहास सोता है।
सिंगरौली के बुद्ध मंदिर की शाम,
जन्नत सा दृश्य संजोता है।।
सिंगरौली में रोज नए जन्मतें,
यहाँ के प्रसिद्ध कलाकार हैं। सिंगरौली में नृत्य, संगीत और अन्य कला से,
होते सपने साकार हैं।।
सिंगरौली के साहित्यकारों में,
कबीर ,रहीम और तुलसी का मंजर है।
सिंगरौली के कवियों, कलमकारों की स्याही से,
लिखा गया है यहाँ का मुकद्दर है।।
सिंगरौली एक जिला व शहर ही नहीं,
भारत के शक्ति का आंगन है।
सिंगरौली की कोयले में भी चमक और
मिट्टी में विकास का चंदन है।।
– शिवांगी गुप्ता –
सिंगरौली बैढ़न (म. प्र.)
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