आदिवासियों की व्यथा सुनने जल्द Singrauli आएंगे राहुल गांधी

Singrauli News: मध्यप्रदेश का सिंगरौली जिला लंबे समय से देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यही जिला पर्यावरणीय विनाश और आदिवासी विस्थापन का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। कोयला खनन परियोजनाओं के विस्तार के नाम पर यहां लाखों हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, साथ ही आदिवासियों के जबरन विस्थापन का मामला अब दिल्ली पहुंच गया है।

आदिवासी पुश्तैनी जमीन छोड़ने के लिए हुए मजबूर

सिंगरौली के कई गांवों में रहने वाले आदिवासी परिवारों का आरोप है कि उन्हें जबरन अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खनन कंपनियों द्वारा पुनर्वास और मुआवजे के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट बताई जा रही है। प्रभावितों का कहना है कि न तो उन्हें पूरा मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की उचित व्यवस्था की गई।

अब यह मामला स्थानीय सीमाओं को पार करते हुए देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। सिंगरौली से आए आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे कोल माइंस के नाम पर उनके जंगल उजाड़ दिए गए, जल स्रोत सूख गए और आजीविका के साधन छिनते जा रहे हैं।

जल्द सिंगरौली आएंगे राहुल

राहुल गांधी ने आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल से कहा- की आप घबराइए मत, मैं यह मामला संसद में उठाऊंगा। उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनके अधिकारों की लड़ाई कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी और जल्द ही वे स्वयं सिंगरौली आकर स्थिति का जायजा लेंगे।

सिर्फ यही नहीं बल्कि राहुल गांधी ने आदिवासियों की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जंगल, जमीन और जल पर पहला अधिकार वहां के मूल निवासियों का है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

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