Singrauli News : पति का सपोर्ट मिला तो सिंगरौली की अनुपमा ने बॉडी बिल्डर बनकर जीते अवार्ड 

Singrauli News : पति का साथ मिले तो महिलाएं आगे बढ़ जाती हैं और यदि मां बेटियों का साथ दे तो कुछ भी कर गुजरने की माद्दा रखती हैं। इसके लिए परिवार के हर व्यक्ति का सकारात्मक होना जरूरी है, क्योंकि लड़कियां भी अपनी सीमाओं में रहकर हिमालय भी फतह करने का हौसला रखती हैं। यह कहना है कि अनुपमा शर्मा का। जिन्होंने में मोरवा के नेहरू नगर में रहते हुए स्वयं को पति के सपोर्ट से पावर लिफ्टिंग खेल में स्टेज पर उतारा और उसके बाद बॉडी बिल्डिंग स्पर्धाओं में एक के बाद एक मेडल जीत कर पहले स्टेट फिर नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं के गोल्ड मेडल जीत कर मुकाम बनाया। अनुपमा शर्मा बताती हैं कि उन्हें बॉडी फिटनेस को लेकर बचपन से ही जुनून था, लेकिन पहले पढ़ाई और फिर शादी, उसके बाद 2017 में पहली बेटी और उसके बाद 2021 में दूसरी बेटी का जन्म होने तक वह फिटनेस तक ही सीमित रहीं। उसके बाद उन्होनें पॉवर लिफ्टिंग के गुर सीखे। इसके बाद 2024 में बॉडी बिल्डिंग के लिए आगे आयीं। मौका मिला तो वे वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली सहित देश के अलग-अलग स्टेट में होने वाली बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता का हिस्सा बनने लगीं। रविवार को वे मप्र के इंदौर में प्रतियोगिता का हिस्सा बनने के लिए गई हुई थीं। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए उन्होंने लड़कियों और महिलाओं को आगे आने के बारे में खुलकर बात की। कहाकि हम अपने परिवार के सपोर्ट के बिना आगे नहीं आ सकते, क्योंकि कितना कठिन होता है कि परिवार सपोर्ट न करे, तब तक आप बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता के स्टेज में बिकनी पहन कर कैसे खड़े हो सकते हैं।

मेहनत रंग लायी, जीततीं गईं मेडल

अनुपमा शर्मा कहती हैं, इस खेल में मेहनत के साथ आत्मविश्वास की भी जरूरत होती है। पहले गेम मैंने एक्स्पोवैली खेला और सिल्वर मेडल प्राप्त किया। 2026 की शुरुआत में यूपी की ऑल ओवर ट्रॉफी जीतकर मिस यूपी बनी। उसके बाद मिस अलीगढ़ का खिताब जीता, इसके बाद कुछ छोटी-बड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रही। मौका मिला और नई दिल्ली में आयोजित प्रतियोगिता में यूआईबीएफएफ में मिस यूनिवर्स रनर अप बनी। हैदराबाद की प्रतियोगिताएं जीती और लखनऊ में पीएसएल प्रतियोगिता में पहली पोजीशन हासिल की। अब तक एक दर्जन से अधिक मेडल, ट्रॉफी जीतकर उन्होंने महिला बॉडी बिल्डिंग के नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में शामिल होने की जगह बना ली है।

बेटियां भी ताइक्वांडो एवं स्केटिंग की स्टेट लेवल खिलाड़ी

अनुपमा ने शुरुआती बातचीत में महिलाओं को आगे बढ़ाने को लेकर खुलकर विचार रखे, जिसका उन्होंने पालन किया। उसका परिणाम है कि उनकी बड़ी बेटी 7 वर्षीय आन्या और 4 वर्षीय छोटी बेटी प्रज्ञा भी स्टेट लेवल ताइक्वांडो एवं स्केटिंग की प्लेयर हैं। जिन्हें खुलकर खेलने की छूट है और वे अपनी पढ़ाई के साथ खेलों की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उनकी मां उन्हें शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी तैयार कर रही हैं। जिसकी वजह से बेटियां और मां प्रतिदिन साथ-साथ योगा और व्यायाम करती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ही नहीं लगातार अभ्यास से राष्ट्रीय अंतस्राष्ट्रीय खेलों में भी अपना स्थान बनाया जा सकता है।

लड़कियों को आगे आने दें….

लड़कियां किसी लड़के से कम नहीं होती हैं। उन्हें माता-पिता या पति के सपोर्ट की जरूरत होती है। अनुपमा कहती हैं कि ऐसे माता-पिता और पतियों से मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि अपने घर की लड़कियों को आगे आने दें। उन पर विश्वास करें, वे हर विधा में अपना नाम रोशन कर लौटेंगी ही। उन्हें बेहतर गाइडेंस और अच्छे वातावरण की जरूरत होती है। बचपन से संजोई हुई इच्छा को विवाह के उपरांत बाहर निकालने कर एक बड़ा मुकाम हासिल करके अनुपमा महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं।

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