Singrauli News: मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के बैढ़न में (उत्कर्ष उमावि.) 9 फरवरी 2026 को आयोजित काव्य गोष्ठी में एक से बढ़कर एक कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की, काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता रीवा की वरिष्ठ रचनाकार डॉक्टर कैलाश तिवारी ने किया जिसमें नवोदित कवित्री शिवांगी गुप्ता की प्रस्तुति ने श्रोताओं और वरिष्ठ साहित्यकारों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी कविता को न केवल सराहना मिली, बल्कि यह नवोदित रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी। मंच पर उनका आत्मविश्वास और भावपूर्ण पाठ उनकी साहित्यिक परिपक्वता को दर्शाता है।
कवयित्री शिवांगी गुप्ता (Poet Shivangi Gupta) का मानना है कि कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से संवाद का सशक्त माध्यम है। वे निरंतर लेखन के माध्यम से अपनी संवेदनाओं को स्वर दे रही हैं और साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
कविता की बोल “कलम की ताकत”
कवयित्री शिवांगी गुप्ता ने कलाम की ताकत को प्रतिपादित करते हुए मंच पर रचना प्रस्तुत की जिसकी बोल- ताकत मत पूछो यह तलवारों से भारी है, जब भी चलती यह कागज पर हिलती दुनिया सारी है। शिवांगी जी के इस कविता ने समाज को यह संदेश दिया कि शब्दों में समाज को बदलने की अपार शक्ति निहित होती है।
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. कैलाश तिवारी ने कहा कि ऐसी काव्य गोष्ठियाँ नई प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ समाज में साहित्य के महत्व को स्थापित करती हैं। उन्होंने आयोजकों को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं।
“कलम की ताकत”
कलम की ताकत मत पूछो, यह तलवारों पर भारी है।
यही तो है दर्पण समाज का, दिखलाता दुनिया दारी है।।
अस्त्र शस्त्र से ज्यादा इसकी मारक क्षमता है।
यह कलम दिखती छोटी पर, समाहित दुनिया सारी है!!
कलमकार होता सच्चा वह, नहीं कभी भी बिकता है।
सच को सच झूठे को झूठा, सदा सत्य ही लिखता है।।
वह शोषित का पक्षकार है, और राष्ट्र का प्रहरी भी है।।
उसके नजर में सभी बराबर,
लिखता सच जो दिखता है।।
यही वंदना मां वाणी से,
जो भी लिखूं अच्छा लिखूं।
रहे सदा सिर हाथ मेरे मां, सदा तुम्हारा बच्चा लिखूं।।
बुद्धि, विवेक बढ़े मेरा मां, मिले मुझे वरदान तुम्हारा।
कभी कलम की मसि सूखे न,दो साहस मां सच्चा लिखूं।।
~ शिवांगी गुप्ता ~
सिंगरौली- वैढन
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