Electric Bus in Singrauli : बस डिपो और चार्जिंग प्वाइंट न बनने से जिले में रुका है 5 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 

Electric Bus in Singrauli : जिले की बदहाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम द्वारा 5 इलेक्ट्रिक बसों की डिमांड एनसीएल से की गई है। एनसीएल अपने सीएसआर मद से 5 बसें देने को तैयार हैं, लेकिन एनसीएल प्रबंधन द्वारा नगर निगम के सामने शर्त रख दी गई है कि पहले बसों को खड़ी करने के लिए सुव्यवस्थित बस डिपो और बसों को चार्ज करने के लिए अलग-अलग जगहों पर चार्जिंग प्वाइंट बनाएं, उसके बाद ही इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने की कावायद गत एक वर्ष से चल रही है, लेकि ननगर निगम डिपो और चार्जिंग प्वाइंट बनवा पा रहा है और न एनसीएल प्रबंधन बसें देने को आगे आ रहा है।

पीएम ई-बस सेवा का भी नहीं है पता

प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर जैसे नगर निगमों के द्वारा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा शुरू कर दी गई है, लेकिन सिंगरौली नगर निगम द्वारा अभी तक पीएम ई-बस सेवा के लिए प्रयास ही नहीं किए गए हैं, जबकि पीएम ई-बस सेवा एक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक योजना है, जिसके शुरू हो जाने से लोगों को आवागमन के लिए बेहतर बसे मिल जाएंगी। ई-बस सेवा के संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा न केवल सब्सिडी दी जा रही है, बल्कि सुविधायुक्त बसें भी उपलब्ध करवाई जाती हैं।

जिम्मेदारों को करनी होगी पहल

लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा देने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग व्यवस्थाओं में सुधार करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। एनसीएल प्रबंधन जब अपने सीएसआर मद से इलेक्ट्रिक बसें देने को तैयार है तो फिर बस डिपो और चार्जिंग प्वाइंट बनाना कोई कठिन काम नहीं है। नगर निगम की जमीनें कई जगहों पर हैं, जहां पर बड़े आसानी से बस डिपो का निर्माण कराया जा सकता है, लेकिन इस काम के लिए न तो नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी आगे आ रहे हैं और न ही चुने हुए जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं, यही कारण है कि शहर की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बदहाल पड़ी हुई है।

कंडम और खटारा बसों का हो रहा संचालन

नगर निगम के सहयोग से वर्तमान में सिंगरौली सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस के द्वारा 8 बसों का संचालन किया जा रहा है। सड़क पर जो बसें दौड़ रही है, वह कंडम हालत मे हैं। किसी की खिड़की के कांच टूटे हैं तो किसी की सीट फटी हुई है। शहरवासियों के पास आने-जाने के लिए कोई दूसरा विकल्प न होने से लोग मजबूरी में केडम और खटारा बसों में यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं। खटारा बसें कहीं पर भी खड़ी हो जाती हैं। यात्री सुविधा के नाम पर बसों में कोई व्यवस्था नहीं है।

जिला मुख्यालय आने में होती है समस्या

जिले के दूरांचल क्षेत्र चितरंगी, बगदरा, सरई, माड़ा, रजमिलान आदि जगहों की पब्लिक को जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए खासी परेशानी उठानी पड़ती है। इन जगहों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधाएं न होने से लोग बड़ी मुश्किल से जिला मुख्यालय पहुंच पाते हैं। सिटी ट्रासपोर्ट सर्विस की जब नींव रखी गई थी तो तय किया गया था कि जिला मुख्यालय से चितरंगी, बगदरा, सरई, माड़ा आदि जगहों के लिए सूत्र बस सेवा चलाई जाएगी ताकि पब्लिक को आने-जाने के लिए साधन मिल सकें, लेकिन 8 साल से अधिक समय बीत गया है, सूत्र बस सेवा में सुधार करना तो दूर एक-एक कर कई बसें बंद हो गई हैं।

इनका कहना है

इलेक्ट्रिक बसें का संचालन करने के लिए एनसीएल प्रबंधन से पांच बसों की डिमंड की गई है। सीएसआर मद से बसे उपलब्ध कराने के लिए एनसीएल द्वारा सहमति दी गई है, साथ ही बसों को सखड़ी करने और इनकी चार्जिंग के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाने को कहा गया है। जल्द ही हर्तों को पूरा कर बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। – अमिताभ यादव, मैनेजर सिटी बस सेवा

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