Singrauli News : सिंगरौली-वाराणसी मेमू ट्रेन के पुरानी, जर्जर व गंदी रैक से यात्रियों को निजात नहीं मिल रही है। लगातार मांग के बावजूद भी मेमू की स्थिति में सुधार नहीं किया जा रहा है। कभी-कभार नयी रैक आती हैं तो फिर महीनों तक वही पुरानी रैक के जरिए मेमू को चलाया जा रहा है। बताया जाता है कि सिंगरौली से वाराणसी तक जिस रैक को लेकर मेमू जाती है, कुछ ही देर में वाराणसी से पटना के लिए उसे रवाना कर दिया जाता है। पटना से दूसरी रैक वाराणसी आती है, वही रैक सिंगरौली भेज दी जाती है।
इस अदला बदली के चक्कर में कभी-कभार अच्छी रैक सिंगरौली आ जाती है, लेकिन स्थायी रूप से मेमू में नई रैक नहीं लगायी जा रही है। मौजूदा समय की अनिवार्य जरूरत है कि मेमू के पुराने या आईसीएफ कोच वाली रैक को बदलकर आधुनिक बॉयो टायलेट वाले एलएचबी रैंक में परिवर्तित किया जाए। इस इंटरसिटी ट्रेन में अन्य इंटरसिटी की तरह एक तृतीय श्रेणी वातानुकूलित, एक वातानुकूलित चेयरकार कुर्सीयान,एक स्लीपर, 7 द्वितीय श्रेणी चेयरकार, 10 सामान्य श्रेणी व एक एसएलआर लगाकर मेमू ट्रेन को और अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है। लेकिन इस मेमू ट्रेन के कोच की दुर्दशा पर रेल प्रबंधन का ध्यान क्यों नहीं जा रहा है।
सावधानी से न बैठे तो चुभ जायेगी कील
सिंगरौली-वाराणसी मेमू के हर कोच में फटी और सिली हुई हुई सीटें, फोम निकली हुई सीटें और उनके नीचे जमी गंदगी नजर आ जायेगी, जिससे यह साफ मालूम पड़ता है कि इस ट्रेन के रखरखाव में कोताही बरती जा रही है। ट्रेन को मेंटिनेंस करने की बजाय उसके कोचों को यूं ही चलाते रहने की नीति अपनाई जा रही है। कई बार तो सीटों से कीलें निकल आती हैं और कपड़े फंस जाते हैं या फिर चुभ जाती है। वर्षों इन्ही दुर्दशाग्रस्त कोच के साथ मेमू को चलाकर यात्रियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
सर्दी में खुद का बचाव करना जरूरी
मौजूदा समय में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। सिंगरौली से सुबह जल्द प्रस्थान करती है और देर 10 बजे तक पहुंचती है, उस समय भी सर्दी तेज रहती है। टूटी हुई खिड़कियां, दरवाजों से आती हुई सर्द हवा के साथ यात्रियों को स्वयं का बचाव करना मुश्किल हो रहा है, इसलिए भी लोग मेमू की बजाय बस की यात्रा करना चाहते हैं। शेड्यूल के अनुसार चलने के कारण यात्री मेमू की यात्रा कर रहे हैं, फिर भी मेमू खाली चल रही है।
आउटडेटेड हो गए हैं कोच
अब तक उपयोग किए जा रहे मेमू ट्रेन के कोच व उनमें लगे पुराने टायलेट्स ही नहीं वॉशबेसिन तक इतने गंदे और पुराने हैं कि अब उन्हें साफ भी नहीं किया जा सकता है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि वे आउटडेटेड हो गये हैं अथवा सर्वे ऑफ की स्थिति में हैं। इनमें न तो पानी उपलब्ध रहता है और नहीं किसी यात्री के उपयोग की स्थिति में हैं। टूटे हुए पाइप, टायलेट व नल की वजह से कोच में पानी उपलब्ध नहीं रहता है। यात्री सिंगरौली-वाराणसी मेमू ट्रेन में फटी सीटों और गंदगीयुक्त कोच को लेकर कई बार शिकायतें भी करते रहते हैं। यात्री सिंगरौली-वाराणसी के बीच मेमू की यात्रा की जानकारी देकर इससे यात्रा करने वाले यात्रियों को हतोत्साहित भी करते हैं। जब तक मेमू के कोच या पूरी रैंक नहीं बदली जायेगी, इस ट्रेन का यात्री भरपूर उपयोग नहीं कर पायेंगे। इस कारण दिन-प्रतिदिन इसकी उपयोगिता कम होती जा रही है.