Singrauli News : नगर निगम सिंगरौली की स्थापना को 25 साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन यहां अभी तक आवारा कुत्तों पर अंकुश के उपाय नहीं हो सके हैं। शेल्टर तो छोड़िए स्ट्रीट डॉग्स की संख्या में कमी लाने के लिए स्टरलाइजेशन की व्यवस्था तक नहीं है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग डॉग बाइट का शिकार बन रहे हैं।
बीते साल नवंबर से लेकर इस वर्ष नवंबर तक जिले में 6944 लोग डॉग बाइट का शिकार बने। इसमें से 2684 लोग जिला अस्पताल पहुंचे, यानी इनमें अधिसंख्य नगर निगम क्षेत्र के निवासी थे। यही नहीं,चितरंगी, मोरवा, निवास, खुटार व देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले पीड़ितों की संख्या भी अच्छी-खासी रही। डॉग बाइट के साथ ही जिले में बिल्लियों व बंदरों का भी आतंक बढ़ रहा है।
गत वर्ष नवंबर से अब तक जिले में 675 लोगों को बिल्लियों ने काटकर जख्मी किया तो 283 लोग बंदरों का शिकार बने। बिल्लियों के काटने की ज्यादातर घटनायें वैढ़न क्षेत्र में हुई, क्योंकि लोग उपचार कराने जिला अस्पताल पहुंचे। इसी तरह बंदरों के काटने की सर्वाधिक घटनाएं निवास, चितरंगी और वैढ़न क्षेत्र में हुई
स्टरलाइजेशन व धरपकड़ के प्रति नगर निगम अमला गंभीर नहीं
नगर निगम प्रशासन आवारा कुत्तों की धरपकड़ और उनकी नसबंदी के प्रति गंभीर नहीं दिखता है। यही वजह है कि नगर निगम क्षेत्र में ऐसा कोई मोहल्ला नहीं होगा जहां इनकी संख्या अधिक न हो। कायदे से इनकी संख्या कम करने के लिए नगर निगम को स्टरलाइजेशन का अभियान चलाने के साथ कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर हाउस बनाना चाहिए, मगर एनटीपीसी के राशि देने के बाद भी कुत्तों, बंदरों और बिल्लियों सहित अन्य जानवरों के रेस्क्यू व उपचार की व्यवस्था नहीं हो पाई है। स्टरलाइजेशन सेंटर की स्थापना के लिए दो साल बाद प्रक्रिया हो रही है।
जून से नवंबर के बीच हुई कैट बाइट की अधिक घटनाएं
बिल्लियों के काटने की घटनाएं तो वर्ष के प्रत्येक महीने में हुई, लेकिन इस वर्ष जून से नवंबर के बीच अधिक लोग घरेलू बिल्लियों का शिकार बने। मसलन, गत वर्ष नवंबर व दिसंबर में क्रमशः 24 और 23 लोगों को बिल्लियों ने काटा। वहीं जनवरी में 35, फरवरी में 45, मार्च में 41, अप्रैल में 38, मई में 39, जून में 61, जुलाई में 77, अगस्त में 59, सितंबर में 75, अक्टूबर में 74 और बीते नवंबर माह में 84 लोग कैट बाइट से पीड़ित होकर जिला अस्पताल पहुंचे।
निवास क्षेत्र में बंदरों के काटने के हुए अधिक वाकये
इसी तरह गत वर्ष नवंबर और इस साल अप्रैल में क्रमशः सात और आठ लोग बंदरों का शिकार बने तो शेष महीनों में यह संख्या न्यूनतम 12 से लेकर 39 तक रही। बंदरों के काटने की अधिक घटनायें निवास क्षेत्र में हुई। चितरंगी और वैढ़न में भी लोग बंदरों के उत्पात से पीड़ित हुए। अन्य जगहों पर यह स्थिति नहीं दिखी।
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