Singrauli News : नाट्य मंचन, सीरियल और फिल्मों के प्रति बचपन से झुकाव के चलते सिंगरौली के संजय प्रसाद ने मायानगरी में अपना स्थान बना लिया है। सबसे पहले अपनी फिल्म इलाका किशोरंगज के जरिए बिहार, झारखंड और बंगाल में धमाल मचाया, जिसे झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रीमियर शो देखकर प्रमोट किया। उसके बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म मया के पाती ने शोहरत दी। अब 23 दिसंबर को खेलो इंडिया के अंतर्गत आयोजित नेशनल ट्राइबल गेम्स में संजय व उनकी पत्नी के द्वारा रचित गीत को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने थीम सांग के रूप में चयनित कर अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है, जो कि फरवरी 2026 में होने वाले राष्ट्रीय आदिवासी गेम्स में अधिकारिक तौर पर बजाया जायेगा। संजय ने एक दशक तक संघर्ष कर अब मुंबई में अपनी पत्नी के साथ जे. नूतन पंकज नाम से फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में पहचान बनाई है। जे. नूतन पंकज बताते हैं कि मैं मूलतः सिंगरौली निवासी हूँ और वर्तमान में मुंबई फिल्म उद्योग में फिल्म निर्देशक, संगीत निर्देशक एवं कथा लेखक के रूप में सक्रिय हूँ। मेरी रचनात्मक यात्रा संघर्ष, साधना और निरंतर प्रयास से गढ़ी गई एक कहानी है।
मया की पाती फिल्म व गीतों ने दिलायी बड़ी पहचान
बातचीत में पंकज ने बताया कि उनकी और पत्नी की रचनात्मक जोड़ी ने कई गीतों के वीडियो का निर्माण किया। वर्ष 2025 में हमने छत्तीसगढ़ी फिल्म मया के पाती का निर्माण किया। जिसमें कहानी, संगीत और निर्देशन तीनों की जिम्मेदारी मेरी रही। फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला और इसके गीत जी म्यूजिक से रिलीज हुए। हाल ही में 23 दिसंबर को खेलो इंडिया के अंतर्गत आयोजित नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए हमारे द्वारा रचित गीत को स्पोटर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने थीम सॉन्ग के रूप में चयनित किया है। जिसे उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर भी स्थान मिला। यह गीत छत्तीसगढ़ सहित राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया के अधिकारियों द्वारा अत्यंत सराहा जा रहा है।
वाद्य यंत्रों को बजाने की थी समझ
वे बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही वाद्य यंत्रों को बजाने की सहज और प्राकृतिक समझ थी। एमबीए के पश्चात कार्यरत रहते हुए ही सिंगरौली एवं आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न आर्केस्ट्रा दलों के साथ रिदम प्लेयर के रूप में अनेक मंचीय प्रस्तुतियां दी। यह सिलसिला 1982 से 1994 तक चलता रहा। पिता स्व. रमा शंकर प्रसाद सिंगरौली क्षेत्र की विभिन्न कोयला खदानों में सेवाएं देने के उपरांत 1994 में गोरबी प्रोजेक्ट से पर्सनल मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए। उसी वर्ष मेरा विवाह नूतन शंकर से हुआ, जो स्वयं संगीत प्रभाकर हैं। मैंने भी प्रयाग संगीत समिति प्रयागराज से संगीत प्रभाकर की उपाधि व ट्रिनिटी स्कूल ऑफ म्यूजिक लंदन से ग्रेड-5 की परीक्षा उत्तीर्ण की। जे पंकज नूतन बताते हैं कि वे और पत्नी अपनी पसंद का कुछ बड़ा करने दिल्ली आए। यहीं मैंने वीनस म्यूजिक के लिए शराब है लाजवाब शीर्षक से एक कव्वाली संगीतबद्ध की, जिसे साबरी ब्रदर्स ने स्वर दिया और वह अत्यंत लोकप्रिय हुई। इसके बाद माता की भेंटों का सृजन किया, जिनमें मां तेरा जयकारा और पहाड़ों वाली माता विशेष रूप से चर्चित रहा।
कई सीरियलों में दिया बैकग्राउंड म्यूजिक
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के उद्देश्य से 2010 में पंकज मुंबई आए। परिवार दिल्ली में रहा। करीब चार वर्ष बैचलर के रूप में संघर्षपूर्ण जीवन जिया। इस दौरान धारावाहिकों में बैकग्राउंड म्यूजिक देने के मौके मिले। हम फिर मिलेंगे, उमराव जान, अदा सहित लंबे समय तक चलने वाले सीरियल्स में काम किया, कई बार इनके योगदान का श्रेय किसी और के नाम से गया, पर घबराए नहीं, पीछे नहीं हटे, संघर्ष करते रहे।
भोजपुरी फिल्में कीं
2012 में जे. नूतन पंकज के नाम से भोजपुरी फिल्म मेहरारू चाही मिल्की व्हाइट तथा प्रीत न जाने कौन रीति में संगीत दिया। फिर हिंदी फिल्मों डॉन के बाद कौन, जयपुर में शादी उदयपुर में तलाक सहित अन्य प्रोजेक्ट में संगीत निर्देशक रहे।