MP News : मध्य प्रदेश के सिंगरौली में संविदा कर्मचारी 6 महीनों से बिना वेतन काम करने को मजबूर

MP News : मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग में पदस्थ संविदा कर्मचारी व उपयंत्री आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। बच्चों की स्कूल फीस से लेकर अन्य जरूरी कार्य करने के लिए दूसरे के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं।

इसके बाद भी योजनाओं में प्रगति लाने के लिए अलग से मानसिक दबाव डाला जा रहा है। परेशान संविदा कर्मियों ने बताया कि पिछले 6 माह से उपयंत्रियों का मानदेय नहीं मिला है। वहीं चार माह से रोजगार सहायक, एपीओ, सहायक लेखा अधिकारियों व लेखा अधिकारियों को मानदेय नहीं दिया गया। जब भी जिम्मेदारों से इस संबंध में बात की जाती है तो बोला – जाता है कि भोपाल से बजट ही नहीं एलाट किया जा रहा है, जब तक बजट नहीं आएगा, मानदेय खाते में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। मानदेय न मिलने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जा रहा है। सभी लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं।

कई लोग ऐसे हैं, जिनके परिजनों का उपचार बाहर के अस्पतालों में चल रहा है। सभी अपने नात रिश्तेदारों से पैसा लेकर किसी तरह से काम चला रहे हैं। सबसे खराब स्थिति उस समय उत्पन्न हो जाती है, जब अधिकारियों के दबाव में ग्राम पंचायतों में जांच व मॉनीटरिंग करने जाना पड़ता है। जिला मुख्यालय से ग्राम पंचायतों की दूरी 60 से 80 किमी है। कम से कम वाहन में 5 सौ से हजार रूपए का इंधन डलवाना पड़ता है, लेकिन इस समस्या को समझना तो दूर अधिकारी कार्रवाई करने की धमकी देते रहते हैं।

बजट न होने का हवाला

शासन द्वारा ट्रेजरी सिस्टम लागू किया गया है। इसके लिए एसएनएस स्पर्श पोर्टल चालू किया गया। नए सिस्टम में शासन द्वारा प्रत्येक मद के लिए बजट स्वीकृत किया जाएगा। उसका मेल जिला लेखा अधिकारी के पास आएगा। इसके बाद फाइल तैयार ट्रेजरी में भेजी जाएगी, वहां से फंड का भुगतान होगा। कुछ दिनों तक यह बताया गया कि स्पर्श पोर्टल ही ठीक से काम नहीं कर रहा है। बाद सुधार होने का दावा किया जाता रहा। अब कहा जा रहा है कि शासन के पास बजट ही नहीं है। केंद्र सरकार से बजट मिला था तो दो माह का आधा मानदेय रोजगार सहायकों व एपीओ, एएओ व ऑपरेटरों को दिया गया था, लेकिन प्रदेश सरकार अपना हिस्सा नहीं दे रही है। इसके कारण बजट न होने का हवाला अब दिया जाने लगा है।

कभी भी काम हो सकता है ठप

संगठन से जुड़े लोगों ने मानदेय न मिलने व आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे पंचायत कर्मियों की समस्या निराकृत करने के लिए अधिकारियों व शासन से मांग की है। वहीं साथ में यह भी कहा है कि यदि शीघ्र मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो कर्मचारी काम करना छोडने के लिए मजबूर होंगे। क्योंकि एक तो बगैर पैसे के घर चलाने का दबाव व दूसरा प्रगति लाने का दबाव सह पाना कठिन है।

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