Singrauli News : वैढ़न शहर क्षेत्र में विशाल मेगा मार्ट के भवन की भांति एक के बाद एक कॉमर्शियल भवनों के निर्माण का क्रम पिछले कुछ समय से जोर पकड़े हुये है। इन भवनों में वाहनों के लिए पर्याप्त स्पेस या फिर बेसमेंट में पार्किंग के लिए जगह नहीं छोड़ी जा रही है, उससे आने वाले कुछ समय में पूरा शहर जाम के साथ-साथ अव्यवस्था और असुरक्षा की भेंट चढ़ जायेगा। इस प्रकार की गंभीर स्थितियां कई शहरों में होती रहती हैं। जिससे सबक लेकर प्रशासन ने शहरों में निर्मित होने वाले खासकर कॉमर्शियल भवनों के लिए भूमि विकास नियमों को लागू किया था। इसका अनुपालन करने की भी अनिवार्यता भी है, लेकिन ये सब कुछ जानने के बाद यहां सिंगरौली नगर निगम के जिम्मेदार शासन की मंशा को पलीता लगा रहे हैं।
वे कॉमर्शियल भवनों के निर्माण व संचालन में की जा रही मनमानी पर नकेल कसने की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं। ननि के जिम्मेदारों की ऐसी अनदेखियों के कारण शहर में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे कॉमर्शियल भवनों में आगजनी की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या ननि के जिम्मेदारों को भवनों में कोई हादसे का इंतजार है कि फिर उसके बाद उन्हें होश आयेगा? ये सवाल इसलिए क्योंकि नियमों को ताक पर रखकर निर्मित विशाल मेगा मार्ट के भवन में जिस प्रकार से रोजाना सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र होती है तो उसके मद्देनजर वहां हर प्रकार से सुरक्षा इंतजामों को सुनिश्चित भी किया जाना चाहिए, इसलिए जनहित की दृष्टि से इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
विशाल मेगा मार्ट के भवन में क्या है फायर सेफ्टी की हकीकत ?
सूत्रों का कहना है कि विशाल मेगा मार्ट के भवन में भले ही फायर सेफ्टी के लिए एनओसी मिली हो, लेकिन जब इस भवन के निर्माण में ही शासन के भूमि विकास नियमों को दरकिनार कर दिया गया है, तो फिर फायर सेफ्टी से जुड़े आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों को पूरा करने में कितनी गंभीरता की गई होगी, ये अंदाजा लगाया जा सकता है। सूत्र ये भी बताते हैं कि फायर सेफ्टी की कागजी एनओसी से अधिक कुछ नहीं है। इस भवन में इमरजेंसी द्वार के लिए कोई ऐसी जगह चिन्हित नहीं की गई है, जो कि मॉल के भीतर जाने वाले कस्टमर्स को आसानी से दिख सके। बाहर से देखने पर भवन के फ्रंट में एक सीढ़ी का रास्ता जरूर दिया गया है, लेकिन उस रास्ते के प्रवेश द्वार पर भीतर ओर सामग्रियों का ऐसा अंबार लगाया गया है कि अगर कभी जरूरत पड़ी तो उस मार्ग को ही क्लीयर कराने में लंबा समय लग जायेगा। कुछ ऐसी है विशाल मेगा मार्ट के भवन में फायर सेफ्टी की जमीनी हकीकत, जो जिम्मेदारों को पता नहीं क्यों नहीं दिखती।
अन्य आपात स्थितियों से निपटने में खानापूर्ति
इस भवन में शासन के नियमों के तहत भवन के दोनों तरफ किनारे में जगह नहीं छोड़ी गई है और न ही फ्रंट में आवश्यक जगह छोड़ी गई है। नाम के लिए फ्रंट में जो जगह छोड़ी गई है, वह पूरी तरह से बराबर होनी चाहिए, लेकिन विशाल मेगा मार्ट के भवन के फ्रंट में रेलिंग, चबूतरा व ट्रांसफार्मर आदि से पूरी जगह को ऐसे बना दिया है कि आपातकालीन स्थितियों के दौरान ये जगह बचाव से अधिक असुक्षा का कारण बन सकती हैं। इस भवन में इमरजेंसी द्वार के लिए कोई ऐसी जगह चिन्हित नहीं की गई है, जो कि मॉल के भीतर जाने वाले कस्टमर्स को आसानी से दिख सके। बाहर से देखने पर भवन के फ्रंट में एक सीढ़ी का रास्ता जरूर दिया गया है, लेकिन उस रास्ते के प्रवेश द्वार पर भीतर ओर सामग्रियों का ऐसा अंबार लगाया गया है कि अगर कभी जरूरत पड़ी तो उस मार्ग को ही क्लीयर कराने में लंबा समय लग जायेगा।
सेटबैक में ही छिपा है फायर सेफ्टी से जुड़ा आवश्यक पहलू
बता दें कि शासन के तय भूमि विकास नियमों में जो प्रावधान तय किये गये हैं, उनमें फायर सेफ्टी से जुड़े सुरक्षात्मक पहलुओं को भी शामिल किया गया है। ये नियम ये है कि मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के तहत भवन निर्माण अनुज्ञा (बिल्डिंग परमीशन) के लिए साइड में जगह छोड़ने (सेटबैक) के नियम भूखंड के आकार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होते हैं। तीन-तीन वर्ग मीटर (लगभग 32.3 वर्ग फुट) की जगह छोड़ने की अनिवार्यता विशिष्ट भूखंडों या विशिष्ट परिस्थितियों (जैसे 60 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर 0.6 मीटर या 2 फीट सेटबैक) में हो सकती है, लेकिन यह नियम पूरे राज्य में एक समान नहीं है और स्थानीय नगर पालिका/विकास प्राधिकरण के नियमों पर निर्भर करता है। सेटबैक नियम भूखंड के किनारे और सामने छोड़ी जाने वाली खाली जगह से जुड़ा है, जो अग्नि सुरक्षा, वेंटिलेशन और रोशनी के लिए आवश्यक है। सेटबैक भूखंड के आकार पर निर्भर करता है। छोटे भूखंडों जैसे कि 60 वर्ग मीटर तक के लिए कम सेटबैक 0.6 मीटर या 2 फीट की आवश्यकता होती है, जबकि बड़े भूखंडों के लिए यह ज्यादा हो सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में व्यावसायिक भवनों में हुई अगलगी की घटनाएं
पिछले साल अप्रैल माह के दौरान विंध्यनगर रोड में संचालित एक शोरूम में अचानक आग भड़क उठी थी, जिससे मौके पर काफी अधिक अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इस तीन मंजिला भवन में शोरूम के अलावा दो मंजिलों में कुछ परिवार निवासरत थे। इस घटना में एक ही परिवार के 8 लोग झुलस गए थे, जिसमें चार बच्चे शामिल थे।
पिछले साल ही करीब कुछ महीनों पूर्व काली मंदिर रोड में बस स्टैंड के प्रवेश द्वार के सामने एक ज्वेलरी शॉप जो बहुमंजिला दो कॉमर्शियल भवनों की पतली गली में स्थित है, उसमें आग लग गई थी और वहां भीतर तक फायर ब्रिगेड तक नहीं जा सकी थी, फिर फायर ब्रिगेड की पाइप को पहुंचाने में पुलिस को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी।
कुछ वर्ष पूर्व काली मंदिर रोड में एक किराना की दुकान में रात के समय अचानक आग भड़क उठी थी, गनीमत रही कि ये घटना रात के समय होने से जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन दुकान का काफी सामान चपेट में आकर जल गया था। जबकि उस जगह पर दिनभर इतनी अधिक भीड़ उमड़ी रहती है कि अगर घटना दिन में होती तो बड़ी भगदड़ मच सकती थी।
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