मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला काफी ज्यादा प्रसिद्ध जिला है, जब भी भारत के औद्योगिक विकास, बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा की बात होती है, तो मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने आता है। यह जिला केवल कोयला, बिजली या भारी उद्योगों के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि अपनी मिट्टी, धरती, नदियाँ, जंगल और सामाजिक विविधता के कारण भी एक अलग पहचान रखता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सिंगरौली जिले को “भारत की ऊर्जा राजधानी” क्यों कहा जाता है?
विशाल कोयला भंडारण एवं ऊर्जा की नींव

सिंगरौली जिले को भारत की ऊर्जा राजधानी कहे जाने के पीछे सबसे पहला और सबसे बड़ा कारण यह है कि सिंगरौली जिला में पाए जाने वाले विशाल कोयला भंडार और ऊर्जा उत्पन्न करना है, सिंगरौली कोलफील्ड देश के सबसे समृद्ध कोयला क्षेत्रों में गिने जाते हैं। सिंगरौली जिले में उच्च गुणवत्ता वाला कोयला प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसे काला हीरा के नाम से भी जाना जाता है। जो ताप विद्युत संयंत्रों के लिए मुख्य ईंधन का काम करता है। इसी कोयले की उपलब्धता ने सिंगरौली को ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना दिया।
बड़े ताप विद्युत संयंत्रों का केंद्र

इसके अलावा सिंगरौली जिले को भारत की ऊर्जा राजधानी कहे जाने के पीछे दूसरा सबसे बड़ा कारण सिंगरौली जिले में स्थापित बड़े-बड़े ताप विद्युत संयंत्र है जिससे सिंगरौली जिले को ऊर्जा राजधानी का दर्जा मिला हैं। आपको बता दें कि सिंगरौली जिले में एनटीपीसी विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन एशिया के सबसे बड़े ताप विद्युत संयंत्रों में से एक है। इसके अलावा सासन, महान, रिहंद, अनपरा और शक्तिनगर जैसे पावर प्रोजेक्ट्स भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं। इन सभी परियोजनाओं से प्रतिदिन हजारों मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। जिससे बिजली आपूर्ति केवल स्थानीय या राज्य स्तर तक ही नहीं है बल्कि सिंगरौली जिले में उत्पादित बिजली राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली सहित कई राज्यों तक पहुँचाई जाती है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
भौगोलिक स्थिति और परिवहन सुविधा
इसके अलावा सिंगरौली जिले की भौगोलिक स्थिति भी इसे ऊर्जा राजधानी बनाने में सहायक रही है। यह जिला मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है, जिससे कोयले और बिजली के परिवहन में आसानी होती है,और रेल और सड़क नेटवर्क ने जिले के औद्योगिक विकास को तेज़ गति दी है।
आपको बता दें कि सिंगरौली जिले में रेलवे नेटवर्क के माध्यम से कोयले का परिवहन पावर प्लांट्स तक तथा बिजली संयंत्रों के लिए आवश्यक भारी मशीनरी का आवागमन आसानी से होता है। सिंगरौली रेल मार्ग उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़कर इसे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ता है।
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