फेरी लगाकर मोबाइल खरीद रहे लोग
अभी तक यूपी, बिहार, राजस्थान आदि प्रदेशों में फेरी लगाकर पुराने व खराब मोबाइल खरीदने की सूचनाएं आती थीं, लेकिन अपने जिले में भी पुराने व खराब मोबाइल खरीदने वालों की संख्या बढ़ गई है। फेरी लगाकर लोग पुराने मोबाइल खरीद रहे हैं। कोई मोबाइल के बदले बाल्टी, बर्तन, चाय की केतली, बच्चों के खिलौने देने का ऑफर देता है तो कोई पांच सौ से एक हजार रुपये में पुराना व खराब मोबाइल खरीदता है। शहर के हर गली-मोहल्ले में पुराने व खराब मोबाइल खरीदने वाले सुबह से लेकर शाम तक फेरी लगाते रहते हैं। ये लोग कौन हैं और कहां से आये हैं, इनके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है।
सस्ते में खरीदकर जामतारा में बेचते हैं महंगा
फेरी लगाकर पुराने और खराब मोबाइल खरीदने वाले लोग यहां पर सस्ते में खरीदते हैं। सस्ते में मोबाइल खरीदने के बाद वे मोबाइल को जामतारा, कटिहार, राजस्थान व अन्य जगहों पर ले जाकर साइबर ठगों को 10 से 20 हजार में बेचते हैं। साइबर ठग मोबाइल को खरीदने के बाद उसे सुधारकर उसके डाटा को रिकवर करते हैं, उसके बाद वे अपने ठगी के सिस्टम को अंजाम देने में लग जाते हैं। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के मीरजापुर में ऐसे ही एक गिरोह को पुलिस ने पकड़ा था, जो पुराने मोबाइल खरीदता था और साइबर ठगों को बेचता था।
पुराने मोबाइल बेचने से बचें
किसी के पास अगर पुराना मोबाइल या खराब मोबाइल है तो उसे बेचने में सतर्कता बरतें, क्योंकि बेचने के पहले आप मोबाइल का पूरा डाटा डिलीट भी कर देंगे तो भी साइबर ठग मदरबोर्ड व अन्य तरह से डिलीट किए गए डाटा को रिकवर कर लेते हैं। गली-मोहल्लों में फेरी लगाकर पुराने और खराब मोबाइल बेचने वालों को कतई मोबाइल न बेचें। ऐसे लोगों के बारे में संदेह हो तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। किसी को भी आधार नंबर, खाता नंबर, पैन नंबर आदि न बताएं। ऑनलाइन खरीदी करते समय सतर्कता बरतें।
बैंक खाते का करते हैं उपयोग
मीरजापुर में जो आरोपी पकड़ाये गये थे, उन्होंने बताया कि कई लोग मोबाइल में बैंक पासबुक, खाता नंबर, फोटो, आधार नंबर रखते हैं। मोबाइल खराब हुआ या पुराना हुआ तो बदल देते हैं। वहीं मोबाइल साइबर ठग खरीदते हैं फिर ठगी करते हैं। मजूदर और कम पढ़े-लिखे वर्ग के बैंक खाते में साइबर ठग ठगी की राशि भी ट्रांसफर करते हैं, जिसकी जानकारी खाताधारक को नहीं रहती है। पकड़े गये आरोपियों से पूछताछ और छानबीन करने पर पुलिस को पता चला कि कई मजदूरों और अनपढ़ के बैंक खाते में साइबर ठगों ने दो से तीन करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, उसके बाद अपने खातों में पैसों को ट्रांसफर कर लिए।
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