Singrauli News : मकर संक्रांति पर्व आने वाला है। इसके आने के पूर्व ही पतंगबाजी के सिलसिले ने हर जगह जोर पकड़ लिया है। परिक्षेत्र में बच्चों में पतंगबाजी को लेकर उत्साह काफी देखा जाता है। दौर बदल रहा है, मगर पतंगबाजी को लेकर बच्चों में उत्साह व ललक अब भी काफी अधिक देखने को मिलती है। पतंगबाजी के ऐसे उत्साह में तब खलल पड़ जाता है, जब इसमें चाइनीज मांझे का उपयोग किया जाता है। चाइनीज मांझे के कारण किसी के साथ कोई हादसा हो जाता है। जब से चाइनीज मांझों का उपयोग बढ़ा है, तब से उसके कारण होने वाले दुष्परिणामों का ऐसा सिलसिला हर जगह शुरू हो गया है कि अब ये नासूर बनता जा रहा है। जिले में पतंगबाजी का क्रम अन्य शहरों की भांति जोरों पर नहीं चलता है, लेकिन जितने दायरे में ये चलती है, उतने में ही यहां कई बाहर पिछले कुछ सालों में हादसे हो चुके हैं।
चाइनीज मांझे के फेर में फंसते हैं छोटे बच्चे
पतंगबाजी को लेकर बच्चों का उत्साह देखकर अभिभावक भी बच्चों को पतंग दिलाने से परहेज नहीं करते और कई बच्चे तो घर से पैसे लेकर खुद दुकान जाकर पतंगों की खरीदी करते हैं, लेकिन इस बीच कई बार दुकानदार चाइनीज मांझा बेचने के लिए बच्चों ये कहकर भ्रमित करते हैं कि अगर पतंग का अधिक ऊंचाई तक ले जाना है और उसे जल्दी कोई काट न पाये, इसके लिए ये वाला धागा लो और वो धागा होता है चाइनीज मांझा।
स्थानीय मार्केट में बिक रहीं पतंगे व विभिन्न वेरायटी के धागे
इन दिनों शहर क्षेत्र में नन्हें बच्चों के लिए 2-3 इंच की छोटी से छोटी पतंग से लेकर 12 बाई 10 साइज व उससे भी अधिक साइज की पतंग बाजार में बिक्री हो रही है। इसकी कीमत भी साइज के मुताबिक न्यूनतम 5 रुपये से 50-60 रुपये इससे अधिक मूल्य पर बिक रही हैं। वैसे पतंगों से अधिक मूल्य या तो विभिन्न वेरायटी के धागे के रहते हैं। जिसमें परिक्षेत्र में करीब 600 मीटर तक का साददी 150 रुपये गड़ारी, 600 से 1200 मीटर तक का पांडा 400 से 600 रुपये गड़ारी और 6 हजार मीटर तक का मैदानी 1500 से 2200 रुपये गड़ारी तक बिक रहा है।
इनका कहना है
चाइनीज मांझा खतरनाक होता है। इसके लिए जल्द ही नियमानुसार आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।– गौरव बैनल, कलेक्टर